
समीर वानखेड़े ब्यूरो चीफ:
नक्सल प्रभावित और दुर्गम माने जाने वाले गडचिरोली जिले की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर से गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
खास बात ये है कि इस जिले का पालकत्व खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास है और भाजपा महायुति सरकार लगातार स्वास्थ्य सुविधाएं सुधारने के दावे कर रही है, फिर भी ये चौंकाने वाला मामला सामने आया है।
क्या हुआ:
अहेरी के अत्याधुनिक महिला व बाल अस्पताल के 6 कॉन्ट्रैक्ट डॉक्टरों ने एक साथ सामूहिक इस्तीफा दे दिया। इस खबर से प्रशासन में हड़कंप मच गया है। अचानक हुए इस घटनाक्रम से पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है और सेवाएं ठप होने का डर है।
83 करोड़ का अस्पताल, फिर भी संकट:
अहेरी का 100 बेड का ‘महिला व बाल अस्पताल’ 83 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था। CM देवेंद्र फडणवीस ने 8 नवंबर 2025 को इसका उद्घाटन किया था। मकसद था दुर्गम इलाके की माताओं और नवजातों को 24 घंटे प्रसूति और इलाज की सुविधा देना।
लेकिन उद्घाटन के कुछ महीनों में ही अस्पताल को बड़ा झटका लगा है। 6 कॉन्ट्रैक्ट डॉक्टरों के एक साथ इस्तीफे से स्वास्थ्य विभाग की प्लानिंग पर सवाल उठ रहे हैं।
इस्तीफे की वजह क्या:
आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है। चर्चा है कि अगस्त 2026 में होने वाली NEET-PG परीक्षा की तैयारी के लिए डॉक्टरों ने पद छोड़ा है। लेकिन प्रशासन का कोई भी अधिकारी इसकी पुष्टि नहीं कर रहा।
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि प्रशासनिक दबाव, सुविधाओं की कमी, स्टाफ की कमी या अन्य अंदरूनी वजहों से डॉक्टरों ने ये फैसला लिया होगा।
हालत गंभीर:
रिक्त पद: अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर और स्टाफ के कुल 16 पद मंजूर हैं। सिर्फ 7 भरे हैं, 9 पद अभी भी खाली हैं।
सिर्फ 1 रेगुलर डॉक्टर: फिलहाल केवल एक नियमित बाल रोग विशेषज्ञ और 6 कॉन्ट्रैक्ट डॉक्टर सेवा दे रहे थे। अब 6 कॉन्ट्रैक्ट डॉक्टरों ने नोटिस देकर इस्तीफा दे दिया है। ये 30 जून से 10 जुलाई के बीच कार्यमुक्त होंगे।
हजारों मरीजों पर असर: अहेरी, भामरागड, एटापल्ली और सिरोंचा के हजारों महिला-बालकों के लिए ये अस्पताल लाइफलाइन है। डॉक्टरों के जाने से लोगों को फिर जिला मुख्यालय या प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ेगा।
मांग और सियासत:
नागरिक मांग कर रहे हैं कि मामले की गहन जांच हो और खाली पदों पर तुरंत नियुक्ति की जाए।
सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था सुधार के दावे कर रही है, लेकिन CM फडणवीस के देखरेख वाले जिले में ही ऐसी हालत होने से विपक्ष को सरकार को घेरने का मौका मिल गया है।
बड़ा सवाल: 83 करोड़ खर्च करके बनाए अस्पताल में डॉक्टर ही नहीं टिक रहे, तो दुर्गम इलाके की माताओं- बच्चों का इलाज कैसे होगा?












